कांग्रेस पार्टी का डीएनए दलित विरोधी है – गुरु प्रकाश पासवान
# कांग्रेस पार्टी का डीएनए दलित विरोधी है
# दलित समाज को कांग्रेस के साथ घुटन महसूस होती है
# कांग्रेस पार्टी का इतिहास बताता है कि उन्होंने हमेशा तुष्टीकरण को चुना है
दिल्ली ।होली के दिन दिल्ली के उत्तमनगर में दलित युवक तरुण की हत्या मुसलमानों की भीड़ के द्वारा किये जाने पर भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता गुरु प्रकाश पासवान ने मीडिया को संबोधित करते हुए राहुल गांधी के मौन को लेकर राहुल गांधी और कांग्रेस की जमकर आलोचना की। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता ने कहा कि कांग्रेस संवेदनशीलता का ढोंग करती और इन्हें जब भी तुष्टिकरण और सामाजिक न्याय के बीच चुनाव करना पड़ा तो इन्होंने केवल तुष्टिकरण चुना। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी का डीएनए दलित विरोधी है और दलित समाज को कांग्रेस के साथ घुटन महसूस होती है।

उन्होंने कहा कि दिल्ली के उत्तम नगर में जो दुर्घटना हुई है, उस पूरे विषय का राहुल गांधी द्वारा राजनीतीकरण किया जा रहा है। राहुल गांधी वहां जाते हैं जहां उन्हें राजनीतिक लाभ मिलता है, वो हाथरस जाते हैं लेकिन अभी तक वह उत्तम नगर नहीं गए। संवेदनशीलता का ढोंग करते हुए घटना के कई दिनों बाद बस एक ट्वीट के माध्यम से संवेदनाएं व्यक्त कीं गईं। राहुल गांधी आज संवेदन शून्य हो गए हैं, दलित समाज के एक नवयुवक की हत्या होती है तो उनके मुंह में दही जम जाता है जबकि मोहम्मद अखलाक के मामले में वो पहुंचे थे। प्रियंका गांधी और राहुल गांधी वहीं जाते हैं जहां उन्हें राजनीतिक अवसरवादिता सिद्ध होती नजर आती है। इसके पीछे एक योजना है, इसके पीछे कांग्रेस पार्टी की संस्थागत सोच है। अगर तुष्टिकरण और सामाजिक न्याय के बीच चयन की स्थिति हो तो कांग्रेस पार्टी का इतिहास बताता है कि उन्होंने हमेशा तुष्टीकरण को चुना है।
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता ने कहा कि यह आज की बात नहीं है, जब देश स्वतंत्रत हुआ तब तब पाकिस्तान के प्रथम कानून मंत्री योगेंद्र नाथ मंडल थे भी स्वयं बताया था कि उस देश में भी दलितों को अन्याय, अपमान और अत्याचार का सामना करना पड़ा। यही कांग्रेस पार्टी के लोग हैं जिन्होंने सीएए जैसे प्रगतिशील कानून का विरोध किया, जबकि इसका लाभ पाकिस्तान और बांग्लादेश में रहने वाले हिंदू अल्पसंख्यकों, विशेष रूप से दलित समाज के लोगों को मिलना था, जिनमें मेघवाल और अन्य दलित समुदाय शामिल हैं। इसके बावजूद कांग्रेस पार्टी ने उनकी नागरिकता प्रक्रिया को प्राथमिकता न मिले, इसके लिए एड़ी-चोटी का जोर लगाया। देश का दलित समाज, कांग्रेस पार्टी से सवाल पूछना चाहता है और यह स्पष्ट है कि कांग्रेस पार्टी का डीएनए दलित विरोधी है। जब भी कांग्रेस पार्टी के सामने तुष्टिकरण और सामाजिक न्याय के बीच विकल्प होता है, तो वह तुष्टिकरण को ही चुनती है। रंगनाथ मिश्रा कमेटी की रिपोर्ट हो या अन्य सच्चर आयोग की रिपोर्ट हो, जामिया मिलिया विश्वविद्यालय और अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय जैसे संस्थानों में अनुसूचित जाति को प्रवेश और भर्ती में आरक्षण नहीं मिलता, आज कांग्रेस पार्टी को इसपर जवाब देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि हाल ही में राहुल गांधी ने कांशीराम जी को लेकर उन्हें सम्मानित करने की बात कही, लेकिन उन्हें अपना इतिहास देखना चाहिए। कांग्रेस पार्टी ने बाबा साहब अंबेडकर का अपमान किया, उनके देहांत के चार दशक बाद तक उन्हें देश का सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न नहीं दिया। बाद में जब केंद्र में गैर-कांग्रेस सरकार आई, जिसे भाजपा का समर्थन प्राप्त था, तब बाबा साहब अंबेडकर को भारत रत्न से सम्मानित किया गया। ऐसी स्थिति में कांग्रेस पार्टी कांशीराम जी को क्या सम्मानित करेगी? बाबू जगजीवन राम को भी कहना पड़ा था, जैसा कि एम. गुप्ता जी ने अपनी पुस्तक में लिखा है, कि जब तक कांग्रेस पार्टी रहेगी, तब तक कोई दलित भारत का प्रधानमंत्री नहीं बन सकता। वर्तमान में हरियाणा में कुमारी शैलजा का अपमान किया जा रहा है, बिहार में चुनाव के समय सीताराम केसरी को याद किया जाता है और उन्हें श्रद्धांजलि दी जाती है लेकिन किस प्रकार बिहार के एक पिछड़े समाज के व्यक्ति, सीताराम केसरी को कांग्रेस कार्यालय में उनकी धोती तक खीच कर अपमानित किया गया था। कांग्रेस पार्टी पिछड़ों, दलितों और आदिवासियों की अस्मिता की बात कैसे कर सकती है? देश के इतिहास में पहली बार संविधान के सर्वोच्च पद पर एक आदिवासी महिला को बैठने का अवसर भारतीय जनता पार्टी की सरकार में मिला है।
श्री गुरु प्रकाश पासवान ने कहा कि कांग्रेस पार्टी को दलितों की बात अपने मुंह से नहीं करनी चाहिए। कई राज्यों में उनकी सरकारें हैं, वो कहते हैं न कि एससी, एसटी और ओबीसी कहां हैं? जबकि भारतीय जनता पार्टी को जहां-जहां अवसर मिला, वहां उसने वास्तविक प्रतिनिधित्व दिया। ओडिशा में पहली बार भाजपा सरकार बनने पर आदिवासी समाज का मुख्यमंत्री बना, छत्तीसगढ़ में आदिवासी समाज का मुख्यमंत्री बना, मध्य प्रदेश और राजस्थान में दलित समाज के उपमुख्यमंत्री बनाए गए। दिल्ली के उत्तम नगर की घटना से यह स्पष्ट हो गया है कि सामाजिक न्याय और तुष्टिकरण के बीच जब भी विकल्प होता है, तो कांग्रेस पार्टी हमेशा तुष्टिकरण को ही चुनती है। कांग्रेस पार्टी के नेताओं को इस पर स्पष्टीकरण देना चाहिए कि क्या वो दलित समाज को केवल वोट बैंक समझते हैं? क्या कांशीराम या बाबू जगजीवन राम का नाम लेकर लोगों को भ्रमित करना चाहते हैं? आज का दलित समाज बदल चुका है और वह शासन और प्रशासन में अपनी भागीदारी चाहता है। आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी, जो स्वयं पिछड़े वर्ग से आते हैं, उनके शासन में बाबासाहेब अंबेडकर के बाद पहली बार केंद्र में कानून मंत्री के रूप में श्री अर्जुनराम मेघवाल जी बने, पहली बार रेलवे बोर्ड के चेयरमैन के रूप में दलित समाज का व्यक्ति बना और पहली बार आदिवासी समाज के व्यक्ति के रूप में मुर्मू जी को सीएजी बनने का अवसर मिला।
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता ने कहा कि राहुल गांधी को चुनौती है कि कांग्रेस पार्टी के तमाम सामाजिक न्याय के बुद्धिजीवी इस विषय पर खुलकर बहस करें कि उन्होंने वास्तव में दलितों को कितनी हिस्सेदारी दी है? किस प्रकार बाबा साहब अंबेडकर, बाबू जगजीवन राम, सीताराम केसरी और वर्तमान में कुमारी शैलजा तक का अपमान किया है। दलित समाज को कांग्रेस के साथ घुटन महसूस होती है और उत्तम नगर के प्रसंग से यह भी सिद्ध हो गया है कि कांग्रेस पार्टी को जब भी अवसर मिलता है, वह राजनीतिक अवसरवादिता का सहारा लेती है और विकल्प मिलने पर हमेशा तुष्टिकरण को चुनेगी। रंगनाथ मिश्रा कमेटी, सच्चर कमेटी, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय और जामिया मिलिया यूनिवर्सिटी से जुड़े तथ्य इस बात को स्थापित करते हैं कि कांग्रेस पार्टी आज भी तुष्टिकरण की राजनीति में लिप्त है। कांग्रेस का सामाजिक न्याय, संवैधानिक मूल्यों, संवैधानिक आदर्शों, पिछड़े वर्गों की हिस्सेदारी और वंचितों की अस्मिता से कोई वास्तविक संबंध नहीं है और यह बात उत्तम नगर के प्रसंग से स्पष्ट हो जाती है।




